यूनिवर्सिटी से एक साथ दो डिग्री कोर्स कर सकेंगे छात्र : यूजीसी ने किया एलान, जानिए इससे जुड़े सभी नियम

भारत में सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित उच्च शिक्षा प्रणाली है ।जो यूएसए और चीन के बाद दुनिया में तीसरी सबसे बड़ी शिक्षा प्रणाली है। यहां विश्वविद्यालय अनुदान आयोग कार्य करता है और अपने मानकों को लागू करता है ।तथा केंद्र और राज्य सरकार के बीच में शिक्षा के क्षेत्र में समन्वय बनाने में भी मदद करता है।

इसी सत्र से जारी हो जाएगी नई गाइडलाइंस यूजीसी ने हाल ही में अपनी नई गाइडलाइंस जारी की है ।जिससे उच्च शिक्षा के क्षेत्र में काफी क्रांतिकारी परिवर्तन आने की संभावना है। नई गाइडलाइन में यूजीसी ने दो कोर्स की एक साथ ली हुई डिग्री को मान्यता देने की बात कही है ।यह गाइडलाइंस ग्रेजुएशन के साथ-साथ पोस्ट ग्रेजुएशन और डिप्लोमा कोर्स के लिए दी गई है। इसकी शुरुआत भी इसी सत्र 2022-23 से की जाएगी। गाइडलाइन जारी करते हुए यूजीसी के चेयर पर्सन एम जगदीश कुमार ने कहा कि:-

“स्टूडेंट्स अब हायर एजुकेशन लेवल पर दो डिग्री कोर्स एक साथ कर सकेंगे। दोनों डिग्री फिजिकल मोड या एक ऑफलाइन और दूसरी ऑनलाइन या फिर दोनों ही ऑनलाइन हो सकती है।”

गाइडलाइंस मानने या न मानने का फैसला यूनिवर्सिटी का खुद का होगा नई गाइडलाइन जारी होने के बाद से अब छात्र बी.ए., बीटेक और एमटेक या एमएससी जैसे दो स्ट्रीम के कोर्स एक साथ कर सकेंगे। इसके लिए जरूरी सिर्फ यही है कि दोनों कोर्स को एक ही स्तर का होने चाहिए। जैसे या तो ग्रेजुएशन लेवल के ही कोर्स हो या पोस्ट ग्रेजुएशन के। पोस्ट ग्रैजुएशन और ग्रैजुएशन के कोर्स एक साथ नहीं किए जा सकेंगे। हालांकि नई गाइड लाइन मानना यूनिवर्सिटी के लिए ऑप्शनल होगा। यूनिवर्सिटी चाहे तो उसे मान सकती है या नहीं भी। लेकिन यूजीसी अपनी तरफ से सभी यूनिवर्सिटी को इसके लिए प्रोत्साहित करेगी।

देश के साथ विदेशी यूनिवर्सिटीज से भी कोर्स करने की छूट ऐडमिशन इसी सत्र से शुरू किया जाएगा। छात्रों के लिए ऑप्शन की बात करें तो छात्र दोनों कोर्स को एक ही यूनिवर्सिटी से कर सकते हैं या अलग-अलग यूनिवर्सिटी से भी या फिर एक कोर्स देश की यूनिवर्सिटी से तो दूसरा विदेशी यूनिवर्सिटी से कर सकते हैं। इसके अलावे पढ़ाई में भी छात्रों के पास विकल्प है कि वह दोनों कोर्स फिजिकल मोड पर करें सिर्फ दोनों डिग्री कोर्स की टाइमिंग एक ना हो बस इसका ध्यान रखना जरूरी है। इसके अलावा एक कोर्स फिजिकल और दूसरा ओपन और डिस्टेंस लर्निंग मोड से भी हो सकता है। या फिर दोनों कोर्स या तो ऑनलाइन या दोनों ओपन और डिस्टेंस लर्निंग मोड से किया जा सकता है।

सब्जेक्ट कॉम्बिनेशन से लेकर अटेंडेंस का निर्णय लेने की स्वतंत्रता यूनिवर्सिटी को रहेगी सब्जेक्ट कंबीनेशन का फैसला यूजीसी ने पूर्णता यूनिवर्सिटी पर छोड़ दिया है। यूनिवर्सिटी अपनी क्राइटेरिया खुद तय करेगी कि वह दो डिग्री के लिए किस तरह के सब्जेक्ट के विकल्प देती है। इसके साथ ही साथ अटेंडेंस के लिए भी यूनिवर्सिटी अपनी गाइडलाइन जारी खुद कर सकती है।लेकिन यदि कोई छात्र किसी भी क्षेत्र में विशेष डिग्री लेना चाहता है तो यूनिवर्सिटी के मिनिमम क्राइटेरिया के अनुसार उसे उस कोर्स की बेसिक जानकारी का होना काफी जरूरी है।

भारत में हायर एजुकेशन की डिमांड और सप्लाई में काफी बड़ा गैप है। काफी कम ही स्टूडेंट्स को कैंपस में एडमिशन मिल पाता है। और डिस्टेंस लर्निंग के बावजूद अच्छे कोर्स में भी सीट खाली रह जाती। सिर्फ इसलिए क्योंकि स्टूडेंट्स एक साथ दो कोर्स नहीं कर पाते हैं। ऐसे में इस नई गाइडलाइन कि शुरुआत का होना काफी फायदेमंद रहेगा।

यूजीसी चेयर पर्सन का कहना है कि “नई गाइडलाइन सरकार की न्यू एजुकेशन पॉलिसी का ही हिस्सा है। साथ ही साथ यह भी कहा कि स्टूडेंट के लिए ऑफलाइन मोड में दो डिग्री कोर्स करना काफी मुश्किल होगा, लेकिन इंपॉसिबल नहीं है। दो में से एक डिग्री ऑनलाइन मोड की की जाए तो कोई मुश्किल नहीं होगी। स्टूडेंट चाहे तो अलग अलग डिसिप्लिन की पढ़ाई करके एक साथ कई स्किल सीख सकते हैं। जो उनके भविष्य में काम आएगी”

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