परचून की दुकान से लेकर, UPSC पास कर के, वकालत करने वाले भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के जीवनसफ़र के कुछ ख़ास बातें

भारत के 14वें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जुलाई 2022 में अपना 5 वर्षीय कार्यकाल पूरा कर लेंगे। फिर से संवैधानिक तरीके से भारत के राष्ट्रपति का चुनाव किया जाएगा। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल काफी शांतिपूर्ण तरीके से बीता उनके व्यक्तित्व की बात की जाए तो एक सौम्य सी मुस्कान लिए उज्जवल व्यक्तित्व के धनी कोविंद का काफी प्रतिभाशाली व्यक्तित्व प्रतीत होते है। उनके बारे में कई सारी अहम बातें हैं जो विरले ही लोगों की जानकारी में होगी। जानते हैं ऐसी कुछ खासियत, कुछ अलग बातें भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के बारे में।

छोटे से गाँव से सफर शुरू कर भारत के दूसरे अनुसूचित जाति के राष्ट्रपति बने

रामनाथ कोविंद का जन्म आजादी पूर्व ही 1 अक्टूबर 1945 को कानपुर के एक गांव परौख में हुआ था।ये कोली/कोरी जाति से संबंधित है जिसे कि उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त है। इस तरह से कोविंद भारत के दूसरे अनुसूचित जाति के राष्ट्रपति हैं।पहले के आर नारायणन थे। इनके पिता का नाम मैकूलाल और माता का नाम कलावती है। इनकी एक भाई का नाम प्यारेलाल है जो आज भी झिझक कस्बे में दुकान चलाते हैं। गोविंद अपने पांच भाइयों में सबसे छोटे थे। इसलिए प्यार से घर में सब इन्हें लल्ला बुलाते थे ।चूँकि इनके माता पिता का मृत्यु इनके कम उम्र में ही हो गई थी इसलिए इनकी भाभी विद्यावती ने ही इन्हें पाला पोसा। अब तक राष्ट्रपति महोदय को अपनी भाभी के द्वारा बनाया हुआ कढ़ी, चावल और रासियाउर(गन्ने के रस में बना हुआ चावल) ही पसंद है जो उन्होंने राष्ट्रपति पद के शपथ ग्रहण के दिन भी खाया था.

यु पी एस सी क्वालीफाई करने के बावजूद वकालत को अपना पेशा बनाया

प्रारंभिक शिक्षा की बात की जाय तो इनकी प्रारंभिक शिक्षा सदलपुर ब्लाक के ग्राम खानपुर परिषदीय प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय में हुई थी।इसके बाद डीएलवी कॉलेज से बीकॉम तथा डीएलबी लॉ कॉलेज से विधि स्थानक की पढ़ाई की। यूपी बिहार के हर नौजवान की तरह सिविल सर्वेंट का सपना लेकर दिल्ली चले आए और तीसरे प्रयास से यूपीएससी की परीक्षा भी पास कर ली क्योंकि इनका चयन एलाइड सर्विस के लिए हुआ था, इसलिए उन्होंने नौकरी नहीं की और वकालत को ही आजीविका बनाने का सोचा।वर्ष 1971 में दिल्ली भारत बार काउंसिल के लिए नामांकित हुए तथा 1977 से 1979 तक दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्र सरकार के वकील रहे। 1980 से 93 तक सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के परमानेंट काउंसलर रहे। वहीं वर्ष 1978 में सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड बने ।संक्षेप में कहा जाए तो 1977 से 1993 तक दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम हाईकोर्ट में काफी सक्रिय रहे।

1994 में राज्यसभा सांसद बने और लगातार 12 वर्षों तक बने रहे

राजनीतिक करियर की शुरुआत वर्ष 1990 से ही हो गई थी। जब पहली बार घाटमपुर लोकसभा सीट से भाजपा की तरफ से चुनाव लड़ा था। हालांकि इसमें वह हार गए थे ।परंतु यह राजनीतिक कैरियर का अंत नहीं बल्कि एक मोड़ था। असली शुरुआत हुई वर्ष 1994 में जब यूपी से राज्यसभा के सांसद बने और लगातार 12 वर्षों तक बने रहे।सांसद बनने के दौरान भी रामनाथ कोविंद एक किराए के घर में रहकर एक साधारण जीवन व्यतीत किया करते थे। वर्ष 2010- 2011 में सांसद निधि से परौख गांव के अपने पैतृक घर को राष्ट्रपति महोदय ने ग्राम वासियों के लिए सामुदायिक भवन बना दिया। राष्ट्रपति कोविंद के बारे में एक बात काफी प्रचलित थी कि उनकी याददाश्त इतनी अच्छी है कि आज भी किसी से एक बार मिलने के बाद उसे भूलते नहीं है। अपने गांव के लोगों के साथ आज भी काफी मिलनसार रहते हैं। ऑल इंडिया कोली समाज के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। भाजपा दलित मोर्चा के साथ-साथ भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी रह चुके हैं।

वर्ष 2002 में संयुक्त राष्ट्र महासभा को भी रामनाथ कोविंद ने संबोधित किया था। वर्ष 2006 तक राज्यसभा की सदस्य बने रहें तथा 16 अगस्त 2015 से 20 जून 2017 तक बिहार के 36 में गवर्नर रहे एवं उसके बाद भारत के राष्ट्रपति के तौर पर 25 जुलाई 2017 को पदभार ग्रहण किया जो कि आने वाली जुलाई में समाप्त हो जाएगा और भारत को अपना 15वां राष्ट्रपति फिर से चुनाव के बाद मिल जाएगा।

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