यूपी का मासूम बच्चा..मुंबई जाकर कैसे बने सुपरस्टार क्रिकेटर..जानें- Surya Kumar Yadav की संघर्ष कहानी..

Surya Kumar Yadav : भारतीय क्रिकेटर सूर्य कुमार यादव (Surya Kumar Yadav) किसी परिचय की मोहताज नहीं है। इनके शानदार बल्लेबाजी से लोग प्रसन्न रहते हैं। देश-विदेश में इनके लाखों करोड़ों फैंस है। हर किसी के कामयाबी के पीछे बड़ा संघर्ष छिपा होता है। सूर्य कुमार यादव (Surya Kumar Yadav) ने भी क्रिकेट में आने के लिए कई बड़े संघर्ष का सामना किया। 14 सितंबर 1990 को गाजीपुर में जन्मे सुरेंद्र कुमार यादव (Surya Kumar Yadav) उत्तर प्रदेश के निवासी हैं। मुंबई इंडियंस में बल्लेबाजी का प्रदर्शन कर दिल जीतने वाले कुमार भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा बन कर यहां भी जम कर बल्लेबाजी कर रहे हैं।

सफर रहा कठिन : सूर्यकुमार यादव ने बचपन में सोचा था कि वह क्रिकेटर बनेंगे। परिवार वालों ने भी पूरा सहयोग दिया। स्कूलिंग से लेकर शुरुआती ट्रेनिंग तक करियर को ध्यान में रखकर किया गया। बाद में उन्होंने वेंगसरकर अकादमी में प्रवेश लिया। घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करते रहे। चयनकर्ताओं ने ध्यान नहीं दिया, फिर भी मेहनत नहीं छोड़ी। करीब 10 साल घरेलू क्रिकेट में खुद को आजमाने और आईपीएल में रनों का पहाड़ खड़ा करने के बाद उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ डेब्यू का मौका मिला।

सूर्यकुमार यादव का परिवार बनारस-गाजीपुर के बीच हथोड़ा गांव का रहने वाला है। सूर्यकुमार को बचपन से ही क्रिकेट का शौक था। बनारस की गलियों में क्रिकेट खेलते थे। उनके इस शौक को देखते हुए 10 साल की उम्र में उनके पिता और चाचा ने उन्हें मुंबई भेज दिया। जहां उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर आज भारतीय क्रिकेट टीम में अपनी जगह बनाई। सूर्या के दादा विक्रम सिंह यादव सीआरपीएफ में इंस्पेक्टर थे और उन्हें 1991 में राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था। सूर्यकुमार ने 2016 में अपनी दोस्त देविशा शेट्टी से शादी की थी।

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