MTNL Privatisation: इस कंपनी का सरकार नहीं करेगी निजीकरण, घाटे में होना माना जा रहा कारण

MTNL Privatisation: निजीकरण को लेकर सरकार द्वारा ये कहा गया है कि सरकारी स्वामित्व वाले महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (MTNL) के निजीकरण की फिलहाल कोई योजना नहीं बनाई जा रही है। संचार राज्य मंत्री देवुसिंह चौहान ने राज्यसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि एमटीएनएल को वर्ष 2016-17 से लगातार घाटा हो रहा है और वर्ष 2021-22 में इसका घाटा 2,617 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। मंत्री ने कहा, ‘‘एमटीएनएल के निजीकरण की कोई योजना नहीं है।’’

मिली थी सरकार की मंजूरी
आपको बता दें साल 2019 के अक्टूबर महीने में सरकार की ओर से भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) और एमटीएनएल के लिए पुनरुद्धार योजना को मंजूरी दी गई थी। जिसके तहत दो सरकारी स्वामित्व वाले दूरसंचार निगमों के विलय के लिए सैद्धांतिक मंजूरी मिली थी। मालूम हो एमटीएनएल के अधिक कर्ज और बीएसएनएल की प्रतिकूल वित्तीय स्थिति के कारण, सरकार ने दिसंबर 2020 में MTNL की ऋण हालातों में सुधार आने तक विलय को टाल दिया है।

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क्या है प्लान?
दूसरे प्रश्न का उत्तर देते हुए मंत्रीजी बोले, ‘मंत्रिमंडल ने 14 जून, 2022 को हुई अपनी बैठक में 5-जी सेवाएं प्रदान करने के लिए बीएसएनएल के लिए स्पेक्ट्रम आरक्षित किया था।’ चौहान बोले, ‘‘आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत भारत में बने 4 जी उपकरणों का परीक्षण पहले से ही अग्रिम चरण में है और परीक्षण पूरा होने के बाद उपकरणों की आपूर्ति शुरू हो जाएगी।’’ उन्होंने आगे अपनी बात रखते हुए कहा कि इस उपकरण को लगाने और चालू करने के बाद लोगों को लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। इसके अलावा मंत्री जी बोले कि प्रमुख दूरसंचार सेवा प्रदाताओं का वित्तवर्ष 2018-19 तक कुल लाइसेंस शुल्क (एलएफ) और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क (एसयूसी) बकाया लगभग 1,62,654.4 करोड़ रुपये था।

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